Tuesday, October 29, 2013

यूँ ही..

इन ओस की बूँदों से तुम्हारे लिए जो मोती न चुराए, तो कहना,
दो पल के लिए ही सही, जो तुमने बुलाया और हम न आये, तो कहना,
मर के भी याद रखेगा यह जहाँ हमें, ऐ जाँ,
अब तक किए जो सारे, वो वादे न निभाए तो कहना...

Thursday, September 12, 2013

ये लोग!

राहें सीधी करने के वास्ते, रास्तों को मोड़ देते हैं,
महल खड़े करें तो ना जाने कितने घर तोड़ देते हैं,
बड़े ख़ुदग़र्ज़ हैं दुनिया में ये लोग, ऐ दोस्त!!
इन दिनों तो अपनी परछाई को भी अकेला छोड़ देते हैं|

इंसानियत को नीचा दिखाने के लिए, हैवानियत से रिश्ता जोड़ लेते हैं,
दो झूठ छुपाने की ललक में, हज़ारों सच्चाइयों की गर्दन मरोड़ देते हैं,
ज़िंदगी के अनछुए सवालों के ज़वाब पाने की चाह में ये लोग,
अब कब्रिस्तान में दफ़्न मुर्दों को भी झंझोड़ देते हैं|